#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

क्षणिकाएं

दहेज

बनके वो कार्यकर्ता
शहर में,
दहेज विरोधी
अभियान चला रही है,
इधर घर में
सास की भुमिका में
दहेज के लिएं
बहु को जला रही है।

खाकी

मेरे देश में
खाकी की बड़ी इज्जत है
इनकी ही हर तरफ चलती है,
अमन लाने
कहीं गोलियां
तो कहीं लाठियां चलती है।

प्रापर्टी

सारी प्रापर्टी बेटे के नाम कर
बाप गया जिम्मेदारी
बेटे पर डाल,
बेटे ने बीवी की मानकर
बुढ़े बाप को
घर से दिया निकाल।

संजय अश्क,पुलपुट्टा बालाघाट
मप्र मो-7999840683

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