#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

देखकर हमको दुश्मन हमारे सून्न है

चारो दिशाओ मे हमारे दहाड की गुंज है।

दुश्मन रचकर साजिश मना रहा खैर है,

हमे डर कैसा साथियो हम तो भीम के शेर है।

जब जब दुश्मन इंसानियत के बिगडेंगे

हम और हौसला लिये मंजिल पर बडेंगे।

चलते चलेंगे आगे आम्बेडकर के हम पैर है,

हमे डर कैसा साथियो……!!!

….

उठेगी जो राह मे तोड देंगे हम हर वो दीवारे

तुफानो मे लगाते है हम कश्तियो को किनारे।

सच्चो को सलान करते है,गलत से बैर है,

हमे डर कैसा साथियो…….!

….

ना आंको हमे छोटा ऊंचे विचार,ऊंचे कर्म है

पुजते है मानवता को ,दिल मे हमारे मर्म है।

ये वतन सबका है फिर क्युं,कौन यहां गैर है,

हमे डर कैसा साथियो…….!

….

हर तरफ आपका प्रताप है हे दलितो के मसीहा

ना आया है,ना आयेगा फिर दुनिया मे आपसा।

चमक रहा क्रांतिसूर्य,मिट रहा अंधेर है,

हमे डर कैसा साथियो…..

….

संजय अश्क बालाघाटी

9753633830

195 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *