#Kavita By Sanjay Ashk Balaghati

पता नही

तुमको पाना हकीकत या ख्वाब है पता नही
दिल तुम्हारे लिये क्युं इतना बेताब है पता नही
मुझे पता है तुम्हे मोहब्बत मुझसे नही है मग़र
फिर भी चाहता हुं तुमसे क्युं जवाब पता नही।
—–
पी रहा होगा वो

कैसे जख्मो को सी रहा होगा वो
कैसे मुस्कुरा के जी रहा होगा वो।
जब याद बहुत आती होगी उसकी
तब कहीं जाकर पी रहा होगा वो।
—-
चेहरा है

पलको पर अश्क ठहरा है
जरूर कहीं जख्म गहरा है
लबो को है मुस्कुराने की जीद
पर गम का हंसी पे पहरा है।
मोहब्बत के दुश्मन शहर में है
कोई अंधा है तो कोई बहरा है।
जाऊं कहां कुछ समझता नही
मै तन्हा और यादो का सहरा है।
मतलब परस्त दुनिया है अश्क
दगाबाज यहां हर एक चेहरा है।

संजय अश्क बालाघाटी
बालाघाट
9753633830

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