#Kavita By Sanjay Ashk Balaghati

मिले प्रेम से,बोले मीठी बोली
कुछ तो बदलाव करे इस होली।
….
रंग तो बहोत है इस त्यौहार मे
पर निखार प्रेम रंग से आयेगा
अगर हंसकर मिले हम उनसे
तो वो भी बडते मुस्कुरायेगा
नफरतो की दीवारे गिराकर
चलो मिलके बनाये एक टोली।
मिले प्रेम से …….
….
है रंजिशे जिनके दिलो मे
गुलाल उनके चेहरे पे लगायेंगे
है रूठे जो यार अपने पुराने
लगा के सिने से उन्हे मनायेंगे।
छोडकर जीद अब तो वो भी
समझेंगे वो भाईचारे की बोली।
मिले प्रेम से….
….
मुबारक ऐसा ये त्यौहार रहे
कि ताउम्र प्यार बरकरार रहे
भूलाकर सारे गिले-शिकवे
एक घर एक ही परिवार रहे।
मिलजुल करे काम ऐसा कि
रहे भरी सदा सबकी झोली।
मिले प्रेम से।..
…..
संजय अश्क,
पुलपुट्टा,बालाघाट
मो-9753633830

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