#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

जिन घरो मे साजिशे हुआ करती है मेरे नाम की

वहा की लडकिया तारीफ किया करती है मेरे काम की।

 

हक की लडाई को बगावत का नाम देने वालो

देखना एक दिन मेरी आवाज बनेगी अवाम की।

 

लुटकर गरीबो के घर,छिनकर बेबसो के निवाले

मौज करोगे कब तक,पुरेगी दौलत कब तक हराम की।

 

तुम भी मेरी राह चलोगे मेरी राह मे बारूध रखने वालो

जब लुटेगा ,लुटेरा कमाई तुम्हारे मेहनत घाम की।

 

गांधी के देश मे रहनूमा के भेष मे उत्पाद कब तक……

अभी भवानी आई नही,अभी मर्यादा मे है हम राम की।

 

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