#Kavita by Sanjay Verma

प्रदूषण के गुबार

भौरे की निंद्रास्थली
होती बंद कमल में
उठाती  सूरज की पहली किरण 
देती दस्तक
खुल जाती आँखों  की तरह
पंखुड़ियाँ कमल की

गुंजन से करते स्वागत
खिले फूलों का
मुग्ध समर्पित हो
फूल देते दानी की तरह
किट -पतंगों को मकरंद

भोरें
कृष्ण की राधा के लिए
कभी बन जाते थे

संदेश वाहक

मूछों पर मकरंद लिए
कृष्ण की माला का

बालों में सजे
राधा के फूलों में बैठ
बतियाते गुंजन से-
कृष्ण याद कर रहे

आज वो बात कहाँ ?
फूलों से खुश्बू छीन रहे
प्रदूषण के गुबार
संदेशवाहक भोरें

इसलिए हो गए
अब अपने कर्तव्य से विमुख

संजय वर्मा “दृष्टि”
125 ,शहीद भगत सिंग मार्ग
मनावर जिला -धार (म प्र )

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