#Kavita by Sanjeev Kumar Singh

…….यादें……

किस क़दर तुमने यादों को मिटाया होगा….
याद है मुझको तेरी हर वो बात,
जो तुमने कभी सुनाया था,
कहते कहते अश्क़ आँखों में उतर आया था।
वो एक एक बूंद तुम्हारी पलकों से जब,
हमने उँगलियों पे अपनी उठाया था,
दर्द सब तुम्हारा मेरे सीने में उतर आया था।

किस कदर तुमने यादों को मिटाया होगा।

वो आखिरी मुलाक़ात का मंज़र भी अजीब था
दूर तक हाँथ तुम्हारा थामे चला था,
फिर गाड़ी ने सिटी बजायी,
और फिर पहिये ने भी रफ़्तार पकड़ ली,
छूट गया हाथ फिर भी नज़रों को न हटा पाया था,
धीरे-धीरे तुम नज़रों से ओझल हो गए,
पर मैं वहीँ खड़ा, अपनी नज़रे पलट न पाया था।
रूह रह गयी वहीँ, मैं खली सा लौट आया
मैं खाली सा लौट आया….।©संजीव कुमार सिंह..!

Sanjeev kumar singh

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