#Kavita by Sarla Singh

दीवाली
दीवाली की रौनक हो
घरबार सभी का हो जगमग।
सुन्दर चेतनता छाये ,
अंधकार सब हो गायब ।
जीवन में सबके खुशियाँ छायें,
बागों में सुन्दर फूल खिलें ।
अज्ञानान्धकार में ज्योतिपर्व
ज्ञानज्योति से भर दे प्रकाश।
कोई भी भूखा न सोये जग में,
जग में हो बस मंगल ही मंगल।
रौनक छाये हर एक गली में,
हर घर में उजियाला छाये ।
कालेकलुषित मन में भी,
ज्ञानज्योति छाये अनुपम ।
ज्योतिपर्व है मानव यह,
मत इसको कलुषित करना।
तेरे वश में हो जितना,
जनजीवन में भरना प्रकाश ।
डॉ.सरला सिंह

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