#Kavita By Seema Garg Manjari

नारी परचम ~

नारी की वेदना, नारी की यंत्रणा, नारी की लेखना
पहले थी अपकर्ष, अब है बहुत उत्कर्ष …
चली है नई लहर…

हर इक क्षेत्र में सफलता की लिखी है जुबानी
चूल्हा चक्की, चौका बरतन बनी गुजरे जमाने की कहानी
अब है नई खबर…
अब है बहुत उत्कर्ष ..

सेना में दुश्मन के छक्के छुडाये ,हवाई जहाज उडाये, रेल चलाये
खेलों में भारत का परचम लहराये,मैडल जीते भारत की शान बढाये
खुली है नई डगर..
अब है बहुत उत्कर्ष..

भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज उठाये शराब माफिया की जड खोद भगाये
पर्यावरण सुरक्षा, जल संरक्षण मृदा परीक्षण में बढ आगे आये
सब पर इनकी नजर…
अब है बहुत उत्कर्ष…

राजनीतिक, सामाजिक मुद्दे या हो मानवीय जगत के दुख औ, गम
सारी बेडियों की तोड के कारा आगे बढ़ाये हैं कदम
बढती है शामो सहर..
अब है बहुत उत्कर्ष..

✍ सीमा गर्ग ” मंजरी “

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