#Kavita by Seema Garg Manjari

दीपमालिका ~

आओ दीप जलाये तम को दूर भगाये,जगमग हो जग में
करें संकल्प हो रौशनी पथ में दीप जले हर घर में

नन्हें दीपों को तेल डालकर जलाना,नकली लाइट से बचना
उस गरीब कुम्हार के घर में भी बने दीवाली इसका ध्यान भी रखना

ये नन्हें ज्योतिपुंज तमस से लडकर प्रकाश करते हैं
कैसा भी हो वक्त जलते रहना,चलते रहना का,अमर संदेश देते हैं

देखो ,धरा पर कहीं रह न जाये काला तमस भरा अंधकार
कोने ~कोने दीप जलाकर उज्जवल करना घर संसार

केवल दीप जलाकर ही तुम प्रसन्न वदन न हो जाना
मन के काम,क्रोध,लोभ,मोह को जलाकर मन को प्रकाशित करना

माँ लक्ष्मी हों सबसे प्रसन्न घर ~घर खुशियों की बरसात करें
नन्हें दीप तेल, कपास जला,हम खील बताशों की सौगात भरें

सुख, संतोष ,प्रेम, स्नेह की मधुर खुशी से तन,मन भरना
दीन, गरीब, निर्बल को भी इस खुशी में शामिल करना

मोमबत्ती, दीप, पटाखे, लड्डू, खील, बताशे, बाँट लेना वहाँ, जहाँ गरीब, मजबूर, बेबस की दीवाली होती है
लेकर जाना उन घरों में भी रौशनी की सौगात, जहाँ नन्हीं आँखें खुशियों की आस में पलती हैं

मन मन्दिर में वास प्रभु का देख रहा तेरे सत्कर्मों को
स्वच्छ, निर्मल मन ज्योति का दर्पण बुनता पुण्यकर्मों को

ईश वंदना, प्रेम, प्यार नेह से दामन भर लेना
लेकर मातपिता औ, सबका आशीर्वाद घर में खुशियाँ रौशन करना

✍ सीमा गर्ग “मंजरी “

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