#Kavita by Seema Manjari

बचपन ~

बचपन के मस्ती भरे वो पल भी क्या पल थे
खट्टी मीठी सुहानी यादों के हँसते गाते पल थे

मन करता है मेरा फिर से बच्चा बन जाऊँ
छोड के सारी जिम्मेदारी बचपन के पलों को गले लगाऊँ

भूल जाऊँ सब रीति नीति और उमर का बढना
लौटा लाऊँ फिर से अपना वो किलकारी भरा बचपना

वो सखी सहेली संग मिलकर गुड्डे, गुडिया का ब्याह रचाना
वो झूठमूठ कडाही चढाकर सबको दावत खिलवाना

नई नवेली पोशाक दादी से बनवाकर गुडिया को सजवाना
गुडिया की विदाई हो जब माँ के कलेजे से लगकर आँसू बहाना

खेल ~खेल में डा0 बनकर सखियों को सुई लगाना
इक्कम दुक्कम, आइस पाइस,छुअम छुआई से घर भर में दौड लगाना

सखियों संग मिलकर कच्ची अमियाँ खूब चबाना,खाना
बात ~बात में लडना, रूठना और मनाना

दादी की छाती से लग रातों को परियों, शहजादी की कहानी सुनना
रातों को सोते सपनों में परियों की वादियों में ही घूमना, फिरना

जब ना हो कोई मनमानी तब मुँह फुला रूठ के बैठ जाना
अम्मा, बाबा से प्यार भरी मनुहार कराना,जिद्द मनवाना

मनपंसद पकवानों के माँ से ढेर लगवाना
बाबा से गिन गिनकर सारी फरमाइश बतलाना

मन करता है फिर से लौट जाँऊ उन अलमस्त दिनों में
अम्मा के आँचल में छुपकर दिल बहलाऊँ बचपन से भीगे कुछ दिनों में ||

✍ सीमा गर्ग ” मंजरी “

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