#Kavita by Seema Manjari

दीपशिखा ~~

साथी मेरे,
तेरी वफा की
यादों की चन्द्रिका में
डूबा हुआ ये मेरा
दिल आज भी यूँ ही
धडकता है
लगता है जैसे कि
तू ही दिल में धडकता है
दिल के अरमानों
की नगरी को तूने बडे
प्यार से सजाया था |
ये दिल रेशमी बदलियों में
छुपे चाँद की तरह
मुझमें तेरी यादों
को समेट लाया है |

अब तक ताजा है
जेहन में वो सुहानी, मदभरी,
जज्बाती इक शाम जब तुमने
मलयालज के झोंके की तरह
खिले,महकते सुर्ख गुलाबों
को देकर
प्रेम के अनछुये कुछ पलों
को छूआ था |
वफा की पाक आरजू में
लिपटे हुये झिलमिल
कुछ हसीं ख्बाबों को
मेरे संग पिरोया था |
टकराया था जब मेरे
हाथों से तेरा
हाथ,दिल की धडकन
का काबू मैने खोया था
शरमा के झुकी मेरी
नजरों को जब तूने
प्यार की नजरों से
चूमा था | काँपते हाथों के साथ,
लरजते मेरे अधर कुछ
कहना चाहकर भी
कंपकंपा कर रह गये,
कँपन जैसे मेरी
नस ~नस में भर गया था
बेकाबू सी तेरी वो गहरी नजर
तीर के जैसे जिगर
चीर गयी थी | मैं इन्द्रजाल
सी खिंची, अपलक देखती
ही रह गयी थी

तुम्हारी वो चाहत ,
तुम्हारा प्यार,
तुम्हारी वफा
तुम्हारी हँसी
तुम्हारी वो
दिलनशीं सूरत
दिल के आइने में
बार ~बार तुम्हें देखने
की प्यास,
वो उमंग ,
वो तरंग ,
एक मधुर ,
सलोनी
घटाओं से घिरी
शाम की रंगीन
मुलाकात
तेरी नजरों के
तेरी चाहत के
पहरे से लग गये हों
जैसे मेरे दिल पर ,
मीठी मधुर
झंकार को छेडकर
तारों की लयताल पर
एक गीत गुनगुना
कर तू दूर चला गया
उस मुलाकात की
तेरी मेरी बात की
उन वफाओं की
उन रस्मों,कसमों की
उन जज्बातों की
जो कुछ पल साथ
जिये थे हमने
उन्हें सीने से लगा
लिया है
अपने अरमानों में
तुझको पा लिया है
तेरी वफा के उस पाक रिश्ते
से मेरी राहें रौशन हैं
एक जलता हुआ दिया हूँ
मैं, तेरे पथ का,
तेरे अतीत का ,
तेरे सपनों का ,
तेरी वफाओं का,
तू मेरा नसीब ,
मेरी इबादत
मेरा देवता बन गया है |
मैं तो इक दिया हूँ प्यार का
तेरे लिए जलती हूँ
जलती ही रहूँगी
तेरी वफायें,तेरी यादें
मेरे सीने में दीपशिखा
बन जलती हैं
मैं जन्मों
जन्म तेरे लिए
तेरी राहों में
दीपशिखा बन
यूँ ही जलती रहूँगी

सीमा गर्ग ” मंजरी “

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