#Kavita by Shabnam Sharma

सुबह

रात गहरा गई थी,

काली और काली, और काली,

पर अभी भी कोई तारा

टिमटिमा रहा था,

शायद रात उससे ही

चमक रही थी

और मैं उस सुबह का

इन्तज़ार कर रही थी

जब उस तारे को देखकर,

चाँद संग चमकेंगे सब

तारे इस स्याह रात में,

बनाएँगे सुबह को,

शीतल, सौम्य व

जीवन दायिनी।

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