#Kavita by Shabnam Sharma

वो कहानियाँ

मेरे मानस पटल पर,

वो चंद नानी की सुनाई

कहानियाँ,

वो चंद दादी की दी हिदायतें,

काम आ रही समय की

उतरन के साथ,

कभी-कभी जब बच्चे पूछते हैं

मुझसे कुछ सवाल मेरे बचपन के

बारे में,

तो याद करती हूँ वो घर

के पिछवाड़े का मैदान,

पड़ोस की ताई-चाची, बुआ

की बातें,

गुड्डे, गुड़ियों के ब्याह,

कंचों की ढेरियाँ,

व छुपन-छुपाई के लिये वो गलियाँ,

यकीन नहीं करते बच्चे,

कि बच्चे भी दौड़-धूप का खेल

खेल सकते थे,

क्या कभी 10-20 बच्चे

भी इकट्ठे खेलते थे

मुहल्ले में भी रिश्ते होते थे,

पेड़ों के भी नाम थे,

बूढ़ा पीपल, बूढ़ा आम,

वो ताकते हैं अपने कमरे में

रखे टैब, फोन व खिलौने

जिनसे वो खेलते हैं वो इनसे नहीं,

सुनकर मेरी बातें, उसे कहानी

कहकर, वो दबा देता है बटन

आधुनिक खिलौने के, व

बन जाता है आधुनिक बच्चा।

& शबनम शर्मा] अनमोल कंुज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र.                       मोब. ०९८१६८३८९०९, ०९६३८५६९२३

292 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.