#Kavita by Shabnam Sharma

मन

स्थिरता का नाम नहीं,

पल-पल कुलांचे भरता,

कभी इस पार

तो कभी उस पार,

पहुंच जाता,

अपनों के करीब,

दुश्मनों से दूर,

बना लेता अपनी जगह

अपने फैसले

अपने फासले,

इक अदृश्य डोर से बंधा,

कितने सब्जबाग देखता,

रूला देता अंखियन को

कभी ठहाकों में डूबा देता,

दिखाता वो, जिसकी

कल्पना न की थी,

डराता, सिहराता, हंसाता,

रूलाता, मनाता, रूठाता,

तो कभी किसी अंधेरे

में उकडू हो, बच्चे की

मानिद बैठ जाता ये

मन।

शबनम शर्मा ] अनमोल कंुज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र.

मोब. – ०९८१६८३८९०९, ०९६३८५६९२३

 

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