#Kavita by Shabnam Sharma

खुशी

न जाने कितने पल,

घंटे, महीने

वो काम करता

यही सोच, कि इसमें

किस-किस की हँसी

छिपी है,

फिर भी सुननी पड़ती

कभी ‘आह’ तो कभी ‘वाह’

दुनिया के लिये ‘आह’

कहना जितना आसान

‘वाह’ कहने को ज़माना

चाहिये,

आसानी से नहीं

मिलती दुआ,

न ही दी जाती

खुशियाँ किसी को

क्यूँकि न जाने

कितने जज़्बातों को

सलीब पर लटकना

होता है,

दुनिया के चेहरों पर

खुशी देखने हेतू।

शबनम शर्मा ] अनमोल कंुज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र.

मोब. – ०९८१६८३८९०९, ०९६३८५६९२३

 

 

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