#Kavita by Shabnam Sharma

जन्मदिन

साल भर इन्तजार अपने

जन्मदिन का,

पहनाता है भगवान इक

माला हमारे गले में

वर्षों के मनके पिरोकर,

दिखती नहीं, पर पहने

रहते हम,

हर वर्ष निकाल लेता वो

अपना इक मनका,

वक्त के साथ ये मनके

कम होते चलते व

रह जाता सिर्फ वह कच्चा

मैला सा धागा,

जो अब उठा नहीं पाता

हमारे जीवन का बोझ,

छूते, महसूस करते हम

डसकी मौजूदगी, पर

पता है ये अब सह न

पायेगा हमारा बोझ, टूट

जायेगा व ले जायेगा संग

साँसों की डोर।

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