#Kavita by Shailesh Kumar Singh Vadodara

1.मुझे भी हक़ है

मेरी जिंदगी जीने का।

तुम्हे तकलीफ न होने दूंगी।

बापू मत मार ,

मैं अपनी लड़ाई लड़ लुंगी।

बस एक सहारा दे दे।

मुझे जीने दे बापू।

धरती का एक किनारा दे दे।

 

2.बोझ नहीं मैं माता हु।

बोल नहीं सकती तो क्या

मैं निर्बल हु मुझे जीने दो

हे मानव सृष्टि विधाता हु।

क्या भूल गए अपनी संस्कृति

या भूल गए अस्तित्व,

दिन दूर नहीं घड़ा भर ही चूका

अब भी है वक्त सुधर भी जा

मैं माँ हु माफ़ करुँगी मैं।

 

154 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *