# Kavita by Shambhu Nath

मोहे मत मारो ननद पिचकारी ॥
देखात नहीं तुमका है पाँव भारी ॥
सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥
पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥
 पेट में लल्ला डोल रहा है ॥
बुआ बुआ तोहे बोल रहा है ॥
जल्दी से आयेगी लल्ले की बारी ॥
सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥
पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥
जाय दुवारे उधम मचाओ ॥
मान जाओ रानी हमें न सताओ ॥
जवानी में ज्यादा न काटो तरकारी ॥
सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥
पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥
तुम्हरे भइया से जल्दी बोलूगी ॥
तुम्हरा रिश्ता जल्दी जोडूंगी ॥
सजाओ गी ससुरे में जाय फुलवारी ॥
सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥
पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥
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