#Kavita by Shambhu Nath

आंखो से ओझल होने पर ||
बहुत अधिक रोती थी माँ ||
आँचल मे छुपा के सोती थी माँ ||
ठुमक ठुमुक के  मै चलता था ||
ताली मइया बजाती थी ||
छींक मुझे जब आती थी तो  ||
माँ परेशान हो जाती थी ||
कभी अगर बिमार मै पड़ता  ||
बहुत अधिक माँ रोती थी||
आँचल मे छुपा के सोती थी माँ ||
मेरे लिए जतन खूब करती ||
प्रयत्न करती जल्दी बढ़ जाऊँ||
बिना खाये सोने न देती थी ||
भले से मै थोड़ा सा खाऊ ||
ख्याल बहुत रखती थी अम्मा ||
बचपन में अधिक संजोती थी ||
आँचल मे छुपा के सोती थी माँ ||
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