#Kavita by Shanoo Bajpai

कैसा आया राज देखो ।

लुट रही है लाज देखो।

 

रोज खबरे आ रही है।

लाज लुटती जा रही है।

 

हर तरफ आँसू व्यथा है।

पाप की ऐसी कथा है।

 

हो  गई कैसी नियत  है।

मर रही  इंसानियत है।

 

कोई  सुनता  ही नही है।

क्या गलत है क्या सही है।

 

सत्ता के बड़े नाम है वो।

हुये अब  बदनाम है वो।

 

फर्ज भी वो भूल बैठे ।

सत्ता मद मे फूल बैठे।

 

भेड़ियो की खाल ओढ़े।

दुष्कर्म मे मन को मोड़े।

 

जमीर  भी  मर गया है।

पाप का घट भर गया है।

 

पढ़ लिया है खबर मे।

गिर  गये है नजर मे।

 

उठ नही पायेंगे अब ये।

जेल भी जायेंगे अब ये।

 

घुट- घुट  कर जी रही है।

आँसुओ को पी रही है।

 

घाव भी गहरे बहुत है।

पाव भी ठहरे बहुत है।

 

दर्द खुद मे सह रही है।

पीड़िता ये कह रही है

 

खून मेरा भी खौलता है।

क्रोध मेरा भी बोलता है।

 

अंधकार का विनाश हो ।

इंसाफ का  प्रकाश हो ।

 

गलतियो मे सुधार हो ।

व्यवस्था का उद्धार हो ।

 

सजा भी मौत होनी चाहिये।

पापियो की रूह रोनी चाहिये।

 

“शानू बाजपेई,अपू्र्व”

 

 

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