#Kavita by Shanoo Bajpai

“आप सभी मित्रो को ७२ वे स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये देश नित नई ऊँचाइयो को छूटा रहे और साथ ही साथ उन वीर शहीदो को नमन जिन्होने हँसते हुये अपने प्राणो की आहुति इस वतन के लिये दी जिनकी वजह से हम यह पर्व मना पा रहे है उनके चरणो मे अपनी एक छोटी सी कविता का पुष्प अर्पित करता हूँ।”

आजादी के दीवानो का हम पर्व मनाने आये है।
जिसने हँसकर फंदो को चूमा उनके गीत सुनाने आये है।

लाखो दीप लिये बैठे है उनकी पूजा की थाल मे।
उनके चरणो की धूल लगा ली हमने अपने भाल मे।

एक दीप होगा उन वीर शहीदो के गाँव का।
जिस गोदी मे खेले उस ममता वाली छाँव का।

एक दीप होगा उस माँ का जिसकी गोदे उजड़ गई।
बचपन से यौवन तक की यादे जिनसे बिछड़ गई।

एक दीप होगा उन उजड़े सिन्दूरी सपनो का।
सात जनम तक साथ निभाने वाले वचनो का।

एक दीप होगा उस कंधे का जिस पर दुनिया घूमे थे।
हर ख्वाहिश पूरी की थी तब जाकर वो झूमे थे।

एक दीप उस बहना का जिसकी राखी के धागे टूट गये।
संग मे खेले जो खेल खिलौने वो सारे भी छूट गये।

एक दीप होगा उसका जिसके सपने चकनाचूर हुये ।
अपने पिता की छाया के बिन जीने को मजबूर हुये।

जिनकी चिता बनी थी उन सूनी- सूनी घाटी मे।
कर्ज चुकाकर भारत माँ का दफन हुये थे माटी मे।

इस पावन बेला पर वन्दन भारत के अरमानो का होगा।
शत् शत् बार नमन ऐसे भारत के परवानो का होगा।

“शानू बाजपेई,अपूर्व”

Leave a Reply

Your email address will not be published.