#Kavita by Shanoo Bajpai

किस लिए उत्सव मनाते ,
किस लिए बजते नगाड़े?
मारते हर साल लेकिन,
अब तलक न मार पाए ।
जो किया अपराध उसने,
दण्ड उसका मिल चुका है ।
राम के बाणो से देखो ,
कब का वो तो तर चुका है ।
राम ने मारा उसे पर,
हम उसे ना मार पाए।
आज भी मन में उसको ,
हमने जिंदा रखा है ।
इसलिए हर साल हम,
बस पुतले उसके फूँकते हैं ।
जिस भेष को रखकर,
सीता को चुराया था कभी।
उस भेष का आज भी,
उपयोग वैसे हो रहा है ।
राम की कथा तो भूल बैठे ,
रावण की कहानी याद है।
इसलिए राम से ज्यादा यहां पर,
रावणो की तादाद है ।
राम तो भगवान है ,
विष्णु के अवतार हैं ।
वह हमारी जिंदगी के ,
मूल बस आधार हैं।
रावण तो बुराई का एक रूप था ,
और उसका चरित्र भी रूप के अनुरूप था।
त्रिकालदर्शी और ज्ञानी था बहुत वो,
इसलिए नारायण से बैर उसने ले लिया।
परिणाम से अवगत फिर भी ,
जानकर भी ऐसी रार ठानी।
कुटुम्ब के संग खुद का भी,
उद्धार जो करना था।
और हाथों से स्वयं,
नारायण के तरना था।
अन्याय ,आतंक और बुराई का ,
नाश कर दो।
इस धरा पर स्वर्ग का,
वास कर दो।
राम का चरित्र चित्त मे अपने ,
बस जरा सा उतार लो ।
मार लेना बाद में रावण,
पहले मन के रावण मार लो ।

शानू बाजपेई’,अपूर्व’

Leave a Reply

Your email address will not be published.