#Kavita by shashank tiwari

कई सालों का साथ
सबके बीच में भी
सिर्फ एक दूजे के हम
और अकेले में भी
क्यों किया ऐसा जो
इतनी बेफ्रिकी से
छोड़ दिया मेरी चूड़ियों से भरा हाथ
दुनिया तोड़ने को कह रही है
किसे पता कि तुम
मेरी नसों में बह रहे हो
दुनिया को दिखाने को
मेरी माँग में
तुम्हारी जगह नही है
क्या फर्क पड़ता है मुझे
तुमतो सदासे ही
मेरे बालों में गुहे जाते हो
आज सिंदूर ना सही
सब बात मानते थे
आज एक बात मानोगे ना
हाँ वही कि
हवा में आके थोड़ी सी धूल
मेरे सर पे डाल देना
सज जाऊँगी फिर से
तुम्हारी बनकर
आख़िरी बार जिस जगह से
तुमने मुझे पुकारा था
वहीं खड़ी हूँ
बेचैन है तुम्हारी लाडो
और आज तुम
बेचैनी दूर करने नही आये
आये तो हो !!
हाँ ! मेरी आँखों तक
आँसू बनके
अम्मा ने फिर से मुझे चिढ़ाया
कह रही हैं तुम नही आओगे
लेकिन उन्होंने आज
मुझसे रोकर कहा है ये सब
मुझे नही अम्मा को हँसाने आ जाओ
नही आओगे ना
जानती हूँ मुझपे भरोसा करते हो
हँसा दूँगी अम्मा को
मेरा वादा है
और हाँ मैं वादा नही तोड़ती
तुम्हारी तरह !!
– शशांक तिवारी
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