#Kavita by Shashi Prabha

“जीवन ठहर जाना नहीं,

जीवन का अर्थ निरंतर,

चलते रहना है,

 

परिवर्तन की इस सृष्टि में,

खुद अविरल धारा बन,

कर बहना है,

 

आरोह अवरोह से मष्तिष्क,

के विचारों से गुंजन कर,

चट्टान सा बनना है,

 

साथ लेकर उद्देश्य उर का,

नित दिन इक संघर्ष नया,

सपन हकीकत करना है,

 

मृदभाषी बोलो से जीत लो,

हर जन मन को,साथ,

सबके रहना है,

 

क्या हासिल नफरतों से,

प्रीत से देखो रहकर,

प्रीत ही मिलना है,

 

बहुत खूबसूरत रंगों ,

से सजी जिंदगी ,

संग सबके रहना है,

 

चलते रहो साथ सबके,

मंजिल तक ग़र ,

आपको पहुँचना है,

 

न हौसला खोना मुश्किलो,

से ,मुस्करा कर उनका,

सामना करना है,

 

जीवन ठहर जाना नहीं,

जीवन का अर्थ निरंतर,

चलते रहना है।।

 

( शशि प्रभा)

 

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