#Kavita by Shashi Prabha

शीर्षक —- प्रश्न

 

नव जीवन सृजन करने हेतु,

इस कोख़ में आई थी,

 

कितने स्वप्न पूर्ण करने हेतु,

अभिलाषा मन में लाई थी,

 

नन्हें नन्हें अंगो को देख,

ली पहली अँगड़ाई थी,

 

अद्धभुत संसार की कल्पना ,

कर मन मन मुस्काई थी,

 

माँ ,बाबू ,भाई ,बहन ,रिश्तों में,

बंधने की आस छाई थी,

 

अचानक उनको कुछ याद आया,

फिर गर्भ जाँच करवाई थी,

 

लड़की है सुन सबके चहेरे पर,

जाने क्यो उदासी छाई थी,

 

दूजे दिन खून करके मेरा,

मुझसे सबने मुक्ति पाई थी,

 

सबसे क्या कहूँ ,तुम तो माँ थी,

तुमने क्यो सुध बिसराई थी,

 

क्या था दोष मेरा मुझे बताना,

किस गलती की सजा पाई थी ,

 

माँ जबाब दो,पूँछ रही थी ,वो

सपने में अजन्मी कन्या आई थी।

शशि प्रभा  – 9927737953

बरेली (उत्तर प्रदेश)

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