#Kavita by Shashi Tiwari

तो मैं क्या करूँ,,,,,

 

दिल ए लिफाफे तेरा नाम बन्द किया हर घड़ी,

राज ए उल्फ़त कोई निगाहों से पढ़े

तो मैं क्या करूँ।

कह ना डालु तेरे फ़साने जुबाँ बन्द किया हर घड़ी,

हर शब्द मेरे ग़ज़ल बन जाये,

तो मैं क्या करूँ,,

मैंने ढूंढा तुझे गली और चौराहे पे,

अब अगर पड़ गए पाँवो छाले,

तो मैं क्या करूँ,,

दिल की बस्ती में ना देखा होगा कोइधुवाँ उठते हुए,

अब अगर राख बाकी है ,

तो मैं क्या करूँ,,,

ना मुरादों के दुनियाँ में तमन्ना दिल की,

दिल ही दिल मे दफ़्न हुए,

तो मैं क्या करूँ,,

 

शशि तिवारी महुवा

छत्तीसगढ़

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