#Kavita by Shashi Tiwari

आओ आज फ़ुरसत है,
चलो बैठ्ते है कही,
कुछ तुम कहो,
कुछ हम सुने अनकही,
तुम्हारे पास क्या है सुनाने को,
कुछ नहीं तो गम ही सुना दिजिये,
लोग कहते है तुम्हारे पास्,
खजाना है,,,,,,,
गम का,,,,
धैर्य रखो इसे कोइ नहीं लेगा,
मेरे पास थोड़ी खुशी थी,
किसी जमाने मे,
पुरा हुजूम टूट पडा था,
जिसको जितना नोचते बना,
अपनी झोलीभरी,
और चलते बने,
बस मै अवाक् देखती रही,
मै खुश थी,
कि मेरे पास अपनो की,
तो दोलत है,
अरे फ़िर ये क्या,
सारा हुजूम कहाँ गया,
आज मेरे पास लबालब है,,
ख़जाना गम का,
पर कोई परिन्दा तक ना आया,
ओह्, ख्याल आया,
ये दुनियां है,,
चलो न कुछ बातें करते हैं,
या फ़िर चलो जी भर कर रो लेते है.
शशि तिवरी, महुवा,

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