#Kavita by Shashi Tiwari

भूर्ण हत्या \ रचना,,,

 

 

तू अगर रोशनी है माँ,

तो मैं सुनहरी धूप हूँ,

गौर से मुझें देख ले,

तेरा ही प्रतिरूप हूँ।

 

बेटी हूँ तेरे आँचल की मैं माता,

मुझको ना ठुकरा,,

मुझको ना ठुकरा।

तेरे आँचल मैं मैं सिमटू,

इतना तु दुलरा,,

मुझको ना ठुकरा माँ,,

 

तेरी साँसों में बस जावू,

राह में तेरे मैं फूल बिछाऊ,

मैं तेरे जिगर का टुकड़ा,

मुझको ना बिसरा,,

इतना तू दुलरा माँ,,,,

बेटी हूँ,,,

 

शशि

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