#Kavita by Shiv Kumar Pandit

अत्याचार जब जब बढ़ता है

आतंक की परछाईं

शांत सूरज को ढक लेती है

तब भारत की मिट्टी

अपनी कोख से

कुछ काम निष्काम सम्पन्न कर जाती है

पुरुषोत्तम राम उत्पन्न कर जाती है

 

सामाजिक मूल्यों का जब जब ह्रास होता है

नारी का उपहास होता है

तब भारत की मिट्टी

अपने आँचल से

वीर सिंहों की ललकार दे जाती है

अहिल्या के उद्धारक

राम का अवतार दे जाती है

 

राजनीति के उपवन में

जब नागफनी उग आते हैं

कबूतरों के दाने

बाज चुग जाते हैं

भाई भी बाली बन जाता है

सरल सुग्रीव को

घर से बाहर कर जाता है

तब भारत की मिट्टी

अपनी छाती का दूध

संतानों को पिलाकर

अनंत उपकार कर जाती है

नितिज्ञ राम के चरण धर जाती है – शिव कुमार पंडित

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