#Kavita by Shivansh Bhardwaj

विता

 

इस ज़िन्दगी में वे कभी मिली नही

आँखों को हमारी वे कभी दिखी नही

रही उम्र किसी की तलाश में ही हमारी

वे अब हमारी भी लगता है रही नही

ग़म बहुत रहे उस उम्र मेँ भी

जिसमें महकें फ़ूल खिले

वे हमें कभी दिखे कभी नही

हा अपने होकर भी ज़रूर मिलें

शिवाँश  भारद्वाज  8802358838

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