#Kavita by Shivansh Bhardwaj

जिंदगी के हर

रास्तों से गुज़र रहा हूँ

और सोचता रहता हूँ

कि

जीस्त-ए-म’आनी

क्या हैं

क्या हैं मतलब इन

राहों का

इन

रास्तों में देखें

कई

नये चेहरे मगर

फिर भी मन

में कुछ हैं उलझने

और कुछ हैं

सवाले-जीस्त

मगर लिये अपने

दिलों

में उलझनें

मै चल रहा हूँ

मै कदम

अपने बड़ा रहा हूँ

 

शिवाँश भारद्वाज

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