#Kavita by Subodh Srivastava

त्रासदी

—-

इसमें

तुम्हारा दोष कतई नहीं है

कि तुम

आदमियत से

हैवानियत की ओर मुड़ते

अपने कदमों को

खामोशी से ताक रहे हो

क्योंकि

यह नजरिया तो

तुम्हें मिला है विरासत में

और/ अपनी संस्कृति में

बंधे रहना ही

तुम्हारी पहचान है।

…..

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