#Kavita by Sudhanshu Dubey

दिल के सुनी और निकल पड़ा

लोग कहते है तू कितना बेबस निकला

सायद मैं भी कितना पागल निकला

लोग कहते रहे मैं सुनता रहा

आँसू निकलते रहे,काजल छलकता रहा

फिर सोच आयी

ऐ मुसाफिर बलवान है

विध्यता से परे साहस बड़ा

अभिलाष से परे खुद को अडिग बना

अगर बन सके तो मंजील बन, जंजीर तोड़ राह निकाल

और फिर मिले मंजिल तो सोच अपने मन मोहित मन-अंतर-मनघात को

बाँड से परे धनुष के जहां को

क्योकि

रोने से कभी न हल  निकाला

वाह रे मेरी मेहनत कितना बड़ा तेरा आँचल निकला।।

 

कृत-सुधांशु दुबे

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