#Kavita by Sumati sharma

किसी भी बात पर जो रूठ जाना ज़िन्दगी मुझसे
तो वो उपहार बचपन का मुझे बस लौटा देना तुम
वो मिट्टी के खिलौने और धुली मुस्कान चेहरे की
वो फुलझड़ियाँ , मेरी आज़ादियाँ बस लौटा देना तुम
वो दीवाली की मस्ती और नए कपड़ों की फरमाइश
मेरे मन का वो भोलापन मुझे बस लौटा देना तुम
वो माँ की उंगलियाँ थामे निडर चलते चले जाना
वो भाई बहनो का फिर संग रहना लौटा देना तुम
बहुत कुछ खो गया है पर नहीं उसकी फ़िकर मुझको
पिता की छाँव में बेफिक्र रहना लौटा देना तुम
किसी भी बात पर जो रूठ जाना ज़िन्दगी मुझसे
तो वो उपहार बचपन का मुझे बस लौटा देना तुम….. सुमति शर्मा

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