#Kavita by Sumit Bhardwaj

घाटी की स्थिति पर शोक जताते हुए हमारे द्वारा लिखी गयी एक कविता ।

 

 

आओ बात बताते हैं, सिंहों जैसे युवाओं की,

जिन्होंने नींद उड़ा रखी थी, अंग्रेजी दादाओं की,

वो आज़ादी का दीवाना, आज़ाद हिंद कहलाता था,

दुश्मन को बातों से नहीं, वो गोली से समझाता था,

आज़ाद हिंद के गुट के, सारे युवा हिम्मत वाले थे,

गंगा माँ के गौ माता के, देश के चाहने वाले थे,

उन वीरों के इर्द- गिर्द जब, गद्दारी का ढेरा था,

चंद्र शेखर को अंग्रेजों ने, तब गलती घेरा था,

अंग्रेजों को पीठ दिखाकर, कभी नहीं वो भागे थे,

जाने कितनों को मार के, खुद गोली सीने में दागे थे,

जलियांवाला बाग की घटना, से आँखे भर आयीं थीं,

दुश्मन ने निर्दोषों पर, कैसे गोली बरसायीं थी,

ऐसी हुयी घटना से देखो, पूरा भारत रोया था,

जाने कितने सिंहों को, भारत ने फिर से खोया था,

उस घटना को सुनकर देखो, भगत सिंह झल्लाये थे,

तब स्वामी शुखदेव और राजगुरु को, अपने साथ मिलाये थे,

एसेंबली में बम फेंककर, अंग्रेजों को झटके थे,

रंग बसंती चोला गाते- गाते, सूली लटके थे,

जब अंग्रेजों ने क्रांति कारियों, को धोखे से मारा था,

तब ऊधम सिंह ने डायर को, लन्दन जाकर के मारे था,

राजगुरु, ऊधम, बिस्मिल, और स्वामी शुखदेव ने प्राण गवाये थे,

तब जाकर के अंग्रेजों से, हम आज़ादी पाये थे,

अब दुश्मन सबक सीख ले ये, अंजाम बहुत बुरा होगा,

यदि जागा फिर से शेखर, तो संग्राम बहुत बड़ा होगा,

दुश्मन को बतला दो जाकर, अब एहसान नहीं होगा,

भारत अब दुनिया केे आगे, फिर बदनाम नहीं होगा,

यदि फिर से हथियार उठे, तो नाम निशान नहीं होगा,

काश्मीर तो होगा, लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा ।

 

 

 

रचनाकार- सुमित भारद्वाज

मोहम्मदी खीरी

जिला- लखीमपुर खीरी, उ.प्र.

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