#Kavita by Sumit Kumar Soni

माँग (सिंदूर भरने का स्थान)

 

उनकी माँग सुनी कह रही है चीख कर,

मारो दुश्मनों को आंगनों से खींचकर,

 

कह रही है बिना चूड़ी वाली कलाई,

कह रही हैं अश्रुपूरित आँखों की झाई,

वो कर रहा गद्दारी कौड़ीयों में बिक कर,

उनकी माँग सुनी कह रही है चीख कर,

मारो दुश्मनों को आंगनों से खींचकर ,

 

कह रहा है उनकी धोती का बदला रंग,

कह रहा है उनके जीवन का बदला ढंग,

क्या वतन बचेगा केवल लहू से सींचकर,

अब तो ऐलान कर दो जोश में भींच कर,

मारो दुश्मनों को आंगनों से खींचकर ,

 

शहीदों का बेसहारा परिवार तो देखो,

कोई है अनाथ कोई बीमार तो देखो,

सुधार की आस में माँ की नजर ललचाई,

कोलाहलों में कह रही पिता की दवाई,

जोश भर दो तुम सबके मन को फीचकर,

उनकी माँग सुनी कह रही है चीख कर,

मारो दुश्मनों को आंगनों से खींचकर,

 

रचनाकार – सुमित कुमार सोनी

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