#Kavita by Sunil Gupta

“इन्सान”
“भूल मानवता को जगत में.
यहाँ दौड़ रहा-इन्सान।
स्वार्थ में डूबा साथी जो,
तन-मन बस रहा शैतान।।
पत्थर पूजे नित -दिन साथी,
कब-मिलता यहाँ भगवान?
मात-पिता को पूजे साथी,
वही तो होता-धनवान।।
भाग्यहीन जग में वो साथी,
जो करें माँ का अपमान।
सब कुछ पा कर जग में साथी,
रहते हर पल परेशान।।
भूल मैं जीवन का जो साथी,
दे सके अपनो को मान।
हर पल जीवन में उनके फिर,
संग चलते हैं-भगवान।।

सुनील कुमार गुप्ता

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