#Kavita by Sunil Gupta

“संग चलता रहा जीवन में”
“इन्द्रधनुषी रंगों की चाहत में,
हर पल साथी-
संग चलता रहा जीवन में।
अपनत्व का लगा मुखौटा देखो,
साथी अपना-
छलता रहा जीवन में।
छाये मधुमास संबंधों में,
इसीलिए सहता रहा-
चुभन पतझड़ की जीवन में।
नवभोर की आस में साथी,
गिनते तारे-
बीती कितनी रातें जीवन में।
मानी न कभी हार साथी,
चलता रहा संग चाहत लिये-
अपनत्वकी इस जीवन में।
छटेगी कभी तो गम की बदली,
होगी नवभोर-
गहरायेगे रंग खुशियों के जीवन में।
इन्द्रधनुषी रंगों की चाहत में,
हरपल साथी-
संग चलता रहा जीवन में।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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