#Kavita by Sunil Gupta

“सत्य जीवन का”
“लेखक होकर मैं साथी,
लिखना चाहता-
सत्य जीवन का।
-लेकिन,
साथी लिख न पाया,
सत्य और सत्यानुभूति-
इस जीवन की।
क्योंकि-
कटु सत्य संबंधो में,
भरता कटुता-
इस जीवन में।
इसीलिए-
अपनो की भीड़ में,
ढूंढता रहा –
अपनत्व की परछाई।
अपनत्व मिले न मिले साथी,
चलता रहा अपनो संग-
इस जीवन में।
फिर भी-
लिख न पाया साथी,
सत्य जीवन का-
इस जीवन में।।”
ःःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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