#Kavita by Sunil Gupta

“मुखौटा”
“हर चेहरे पर साथी,
मुखौटा लगा-
नज़र आता।
अपनत्व की चाहत में साथी,
पल-पल-
अपनो से छला जाता।
कहने को तो साथी साथी,
संग चल –
साथ निभाता।
-लेकिन,
स्वार्थ की धरा पर साथी,
चुपके से-
कदम चुरा जाता।
ढूंढता रहा जग में साथी,
साथी साथी-
कब-नज़र आता?
हर चेहरे पर साथी,
मुखौटा लगा –
नज़र आता।।”
ःःःःःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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