#Kavita by Sunil Gupta

‘दर्द”
“दर्द भरा दिल में साथी,
किसी अपने से-
कह न सका।
ढूँढता रहा खुद को साथी,
अपनो की –
भीड़ में।
साथी फूलो की तरह,
महकता था-,
जीवन मेरा।
साथी संबंधों में छाई,
कटुता ने फिर-
हर ली खुशी जीवन से।
काँटो की चुभन ने साथी,
दिये दर्द इतने-
अपनो से कह न सका।
फल-पल बढ़ती रही घुटन,
इस तन-तन में-
जग में सह न सका।
दर्द भरा दिल में साथी,
किसी -अपने से-
कह न सका।।”
ःःःःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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