#Kavita by Sunil gupta

“भीगी पलके”
“भीगी पलके देती अहसास,
कभी खुशी-
कभी गम का।
खुशी में भीगी पलके,
देती अहसास-
खुशियों की बरसात का।
गम में डूबी पलके,
देती अहसास कटुता-
और टूटे संबंधों का।
भीगे न पलके साथी,
महके संबंध-
अहसास हो मधुमास का।
खुशियाँ छाये जीवन में,
भीगे न पलके-
बना रहे अहसास अपनत्व का।
भीगी पलके देती अहसास,
कभी खुशी-
कभी गम का।
सुनील कुमार गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published.