#Kavita By Sunil gupta

“बसे प्रभु मूरत मन में”
“जीवन में हम सफर संग,
ढूँढ़ता नेह जग में।
सुख के पल में भी साथी,
दर्द दिया अपनो नें।।
सहता रहता उसको भी,
अपनत्व मिलता जग में।
दुर्गम था-जीवन -पथ ये,
चलता रहा संग में।।
भूला अपना-बेगाना,
डूबा तन-मन भक्ति में।
चाहत नहीं सुख की साथी,
बसे प्रभु मूरत मन में।।
ःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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