#Kavita By Sunil gupta

“माँ सा कही कोई नहीं”
“पता नही जीवन में साथी,
भगवान होता या नहीं।
आँख खुली तो देखा साथी,
माँ का आँचल संग यही।।
मोह माया के बंधन संग,
खो गया है-जीवन कही।
स्वार्थ की धरती पर साथी,
मोह-भंग हुआ है -यही।।
ममता की ढूँढे छाँव संग,
यहाँ मिली न जग में कही।
माँ की ममता प्यारी-न्यारी,
माँ सा कही कोई नहीं।।
ःःःःःःःःःःःःःःःःःसुनील कुमार गुप्ता

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