#Kavita By Sunil Gupta

“सपने-अपने”
“बिखर गये सब.सपने -अपने,
कैसे-करे उन्हे साकार?
यहाँ जो मिला जीवन पथ पर,
बदल गया उसका व्यवहार।।
अपना बनकर संग चला जो,
उसके मन भी छाया विकार।
आशाओ के इस अंबर में,
कैसे- सपने हो साकार?
दे सुख अपनो-बेगानो को,
बने इस जीवन का आधार।
देखे जो सपने फिर धरा पर,
सभी होते पग-पग साकार।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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