#Kavita By Sunil Gupta

“स्नेंह जल बरसाओ”
“मधुर संबंधो की बदली बन,
जीवन में एक बार-
स्नेंह जल बरसाओ।
मान अपमान की कटुता का,
हृदय बसा ताप-
कुछ तो कम कर जाओ।
शत् शत् नमन करू तुमको,
कुछ तो जीवन में-
ऐसा कर जाओ।
वर्षानुवर्ष निभाता रहा,
संबंधो को-
ऐसे न मुझको तरसाओ।
क्षण-भंगुर हैं-जीवन,
इस सत्य को-
जीवन में बसाओ।
मधुर संबंधो की बदली बन,
जीवन में एक बार-
स्नेंह जल बरसाओ।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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