#Kavita By Sunil Gupta

“अपने मन की”
“कह सकते तो साथी,
कह देते-
अपने मन की।
कौन-सुनता समझता,
साथी तुमको-
जो कहते अपने गम की।
कुछ करते सुनी-अनसुनी,
कुछ हँसते तुम पर-
करते वो मन की।
रहती न हिम्मत तुममे,
जो कह सकते-
हर बात जीवन की।
स्वार्थ की धरती पर,
बिखर जाती –
जिंदगी सपनो की।
कह सकते तो साथी,
कह देते-
अपने मन की।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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