#Kavita By Sunil Gupta

“होली आई-होली आई”

“गहराते रंग संग साथी,
होली आई-होली आई।
सत्य और विश्वास का यहाँ,
नव संदेशा-होली लाई।।
उड़ता अबीर-गुलाल साथी,
उमंग-तरंग मन मे छाई।
झूम-झूम नाचे गाये फिर,
होली आई-होली आई।।
भीगा तन-भीगा मन साथी,
जीवन में फिर उमंग छाई।
भर-भर डालो रंग साथी,
होली आई-होली आई।।
मिटती कटुता तन-मन से जो,
फिर मन मे नव -उमंग छाई।
गहराते रंग-संग साथी,
होली आई-होली आई।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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