#Kavita By Sunil gupta

“सागर”
” सागर सी गहरी लहरे,
अठखेली करता है-मन।
रेत खीची लकीरो सा,
बहकता रहा है-तन -मन।।
शान्त सागर की लहरे,
साथी छिपा गहरा रंग।
ज्वार भाटे संग ही तो,
ये बदलता जीवन रंग।।
शांत होता जब तक मन,
सबका बदल जाता ढंग।
ऐसे ही अशांत मन में,
खोजता अपनो का संग।।

सुनील कुमार गुप्ता

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